
निर्यात हेतु उपयोग में आने वाली स्वचालित मशीनों में, लैंपों को बदलने या उनकी मरम्मत करने हेतु समय बर्बाद करना संभव ही नहीं है। जब ऐसी मशीनें ग्राहकों को भेजी जाती हैं, तो प्रत्येक शिफ्ट में UV विकिरण की मात्रा समान ही रहनी चाहिए। इसी कारण निर्यातक निर्माता हमारे CE-प्रमाणित UV लैंपों का ही उपयोग करते हैं… क्योंकि ये लैंप लगातार काम करने के लिए उपयुक्त हैं, और इनकी गुणवत्ता हमेशा बनी रहती है।
वास्तविक दुनिया में इनका उपयोग
ये लैंप उच्च-दबाव वाले पारा-वाष्प लैंपों पर ही आधारित हैं… ऐसे लैंपों से निकलने वाला विकिरण स्थिर रहता है… जिससे यूवी ऑफसेट, फ्लेक्सो एवं स्क्रीन इंकों में उपयोग होने वाले फोटोइनिशिएटरों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। पूरी लंबाई में विकिरण की मात्रा समान रहती है… जिससे सब्सट्रेट पर ऊर्जा का वितरण समान रहता है। रिफ्लेक्टर में डाइक्रोइक कोटिंग होती है… जिससे उपयोगी UV विकिरण आगे जाता है, जबकि आईआर ऊष्मा नियंत्रित रहती है। इन लैंपों से निकलने वाला विकिरण इतना स्थिर होता है कि इसका उपयोग कोटिंगों की गुणवत्ता जाँच हेतु भी किया जा सकता है… क्योंकि विकिरण की मात्रा एवं तरंगदैर्घ्य स्थिर रहते हैं।
व्यावहारिक विवरण
ये लैंप तभी ही अपनी निर्धारित क्षमता प्रदर्शित कर पाते हैं, जब इनका उपयोग सही बैलास्ट, इग्निटर एवं रिफ्लेक्टर के साथ किया जाता है। यदि लैंप गर्म हो जाता है, या वायु-प्रवाह बाधित हो जाता है, तो लैंप की क्षमता एवं जीवनकाल प्रभावित हो जाता है… इसलिए निर्माता द्वारा निर्धारित शीतलन प्रणाली को साफ रखना आवश्यक है। लैंप के जीवनकाल के आधार पर ही इसकी जगह बदलनी चाहिए… न कि जब इसकी क्षमता प्रक्रिया-मानकों से कम हो जाए।